राजतरङ्गिणी के आलोक में काश्मीर का राजशास्त्रीय चिन्तन

Author(s): अनुपम आनन्द

Abstract:

शोध-सार- काश्मीर में राजतरङ्गिणी की एक विशिष्ट परम्परा प्राप्त होती है, जिसका प्रारम्भ कल्हण द्वारा किया गया है। इतिहास लेखन की आधुनिक दृष्टि राजतरङ्गिणी सर्वप्रथम मान्य ग्रन्थ कही जाती है। कल्हण के उपरान्त जोनराज, श्रीवर एवं शुक की रचनाएँ भी इस नाम से प्राप्त होती हैं। काश्मीर के तात्कालिक परिदृश्य का सम्पूर्ण विवरण यहाँ प्राप्त होता है। काश्मीर के इस कालक्रम में हिन्दू के अतिरिक्त, तिब्बती एवं मुस्लिम सुल्तानों का भी उल्लेख यहाँ प्राप्त होता है। इन ग्रन्थों में राजवंश, राजाओं का विवरण, राजव्यवस्था, प्रजा की स्थिति आदि सहित तात्कालिक राजनीति की भी विस्तृत व्याख्या की गई है।

PDF URL: View Article in PDF