Author(s): Dr. Krishna Panda
Abstract:
भूमिका विवाह संस्कार हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों (षोडश संस्कार) में से एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण संस्कार है। यह न केवल सामाजिक और नैतिक दायित्वों का प्रतीक है, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । विवाह संस्कार का उल्लेख विभिन्न गृह्यसूत्रों में भिन्न-भिन्न विधियों और मंत्रों के साथ किया गया है । यह शोधपत्र विभिन्न गृह्यसूत्रों के अनुसार विवाह संस्कार की विधि, महत्त्व, तथा उसके धार्मिक एवं सामाजिक प्रभावों पर प्रकाश डालता है । गृह्यसूत्रों की संक्षिप्त भूमिका गृह्यसूत्र स्मृति साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण भाग है, जो वैदिक काल से संबंधित वैवाहिक, धार्मिक एवं सामाजिक विधियों का संकलन करता है । गृह्यसूत्रों में वर्णित विधियाँ वैदिक अनुष्ठानों पर आधारित होती हैं और इन्हें अलग-अलग ऋषियों द्वारा संकलित किया गया है । प्रमुख गृह्यसूत्र निम्नलिखित हैं: 1. आश्वलायन गृह्यसूत्र 2. शांखायन गृह्यसूत्र 3. पारस्कर गृह्यसूत्र 4. बौधायन गृह्यसूत्र 5. हिरण्यकेशि गृह्यसूत्र 6. गोभिल गृह्यसूत्र 7. आपस्तंब गृह्यसूत्र 8. काठक गृह्यसूत्र इन गृह्यसूत्रों में विवाह संस्कार की विभिन्न प्रक्रियाओं और विधियों का विस्तृत वर्णन मिलता है ।
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