Author(s): Dr. KODGAVE KISHAN
Abstract:
प्रेमचंद ने भारत की स्वतंत्रता की समस्या को देश की भौगोलिक सीमा में रखने के बदले वैश्विक दृष्टी से देखने का प्रयास किया I इस प्रवृत्ति ने उन्हें संसार के समस्त मानव की आर्थिक खुशहाली, स्वास्थ्य और उन्नति के लिए प्रेरित किया I भारत में समानता के अधिकार और किसानो को अपनी भूमि पर मालिकाना अधिकार की जिन समस्याओं को उन्होंने अपना विषय बनाया था,उन्हें विदेशी तथा अन्य अविकसित देशों में भी महत्वा प्राप्त था I भारत के सामान एशिया और अफ्रीका के कई देश दूसरों की अधीनता से मुक्ति प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे थे I प्रेमचंद ने एक विशाल उदार ह्रदय कलाकार के समान समस्त मानव जाति के अधिकारों के सम्बन्ध में विचार किया था I उन्होंने गोर्की के समान स्वच्छंदतावादी होने के कारन स्वतंत्रता के संघर्ष को तीव्र करने के विचार से अतीत की घटनाओं को लिपिबद्ध किया, किन्तु उनकी अधिकांश कहानियाँ अपने युग के संघर्ष को वजागर करती हैं I प्रेमचंद की 'नमक का दरोगा' कहानी समाज की यथार्थ स्थिति को उद्घाटित करती है I 'पूस की रात' कहानी में भारतीय किसान की लाचारी का यथार्थ चित्रण मिलता हैI 'शतरंज के खिलाडी' इस कहानी को आधार बनाकर 1977 में सत्यजीत राय ने इसी नाम से हिंदी फिल्म भी बनायी थी इस कहानी में प्रेमचंद ने वाजिद अलीशाह के वक्त लखनऊ को चित्रित किया है जो भोग विलास में डूबा हुआ यह शहर राजनितिक-समाजिक चेतना से शुन्य है I
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