Author(s): डॉ. भावना झाला
Abstract:
मानव मन ने अपनी अनुभूतियों को विविध माध्यमों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास आदिकाल से किया है। इन माध्यमों में चित्रकला भी एक विशेश माध्यम रहा है। प्रारंभ में पत्थरों पर अनेक आकृतियों का निर्माण किया जाता था। समय के साथ-साथ संसाधनों के उपलब्ध होने के साथ अनेक रंगों के माध्यम से आकृतियों की रचना की जाने लगी। कालांतर में कला स्वरूप में विकास होता गया और इस कला ने अपने नये-नये आयाम स्थापित करना प्रारंभ किया। विश्व के अनेक देशों में चित्रकला की अनेक शैलियों का विकास हुआ। हर शैली अपनी विशिश्टता लिए हुए है। भारत के संदर्भ में ही बात करें तो यहां अलग-अलग प्रदेश की अपनी चित्रकला शैलियां हैं। लोकचित्र कला के साथ अन्य शैलियों का विकास भी देखने को मिलता है।
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