Author(s): विनय व्यंकट गायकवाड
Abstract:
प्राचीन काल से भारतीय दर्शनों में ईश्वरविचार किया गया है। भारतीय वैचारिक सभी संप्रदायों में ईश्वरतत्त्व का चिन्तन मनन किया गया है तथा आधुनिक काल तक भी चला रहा है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक ईश्वरतत्त्व के क्या विचार प्रस्तुत हुए है, उसमें क्या परिवर्तन हुआ तथा उसकी आधुनिक संकल्पना क्या है यह भाव इसमें प्रकटीत होगा। इसमें मुख्य रूप से भारतीय दर्शनों में ईश्वर संकल्पना के बारे में क्या विचार विमर्श हुआ है यह मुख्य केंद्र बिंदु है। ’ईश्वर’ शब्द की निष्पत्ति में ’ईश ऐश्वर्ये’ धातु से ’वरच्’ प्रत्यय है। ईश्वर सामान्यतः ईश्वरत्वविशिष्ट का अर्थ देता है, अतः किसी भी विभूतिशाली को सापेक्ष रूप से ईश्वर कहा जा सकता है जिस में ईशन का शील, धर्म तथा साधुकारिकता हो एवञ्च पाणिनीय सूत्रों में सापेक्ष ’ईश्वर’ के ही प्रयोग स्वामी या अधिपति अर्थ के साथ पाये जाते है।
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