Author(s): निहारिका धाकड़, डॉ. अनीता
Abstract:
नीति शब्द की व्युत्पत्ति ‘नी’ धातु में ‘‘क्तिन्’’ प्रत्यय करके हुई है। संस्कृत-शब्दार्थ-कौस्तुभ में नीति के लिए ‘भेंट, चढ़ावा, सम्बन्ध, दान तथा सहारा’ आदि पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग किया गया है। सैंट्रल हिन्दी डिक्शनरी में नीति हेतु “Policy, Guidance, Direction, Management, Conduct, Decorum, Plan, Scheme, Right Course of action, Political Science, Moral Philosophy, Worldly Wisdom, Practical Morality” इत्यादि समानार्थक शब्दों का उपयोग हुआ है। मानवीय अस्तित्व के समग्र उत्कर्ष में राजनीतिक, धार्मिक, आर्थिक, शारीरिक एवं आचार सम्बन्धी अभिवृद्धि एवं जीवन-मुक्तत्व की प्रबंधन-युक्ति ही नीति है। नीति तत्त्वों को नैतिक की संज्ञा दी गई है। अभिराज राजेन्द्र मिश्र के अनुव्रजन-काव्य-मालिका में यात्राएँ अनुभूति-परिस्फुटन तथा जीवन-समीकरणों में सृजनधर्मी उष्मा को उत्पन्न करती हैं। इनके पथशरण काव्य-रूपांकनों में नीतिगत विमर्श समाजनिष्ठ दायित्व-प्रज्ञा, मानवोचित संभाषणीय अन्तःक्रिया, सांस्कृतिक अंतर्लय एवं प्रकृति-निष्ठ भावों का समर्पण मूल्य संरूपित स्थिति में आकार लेता है। उन्होंने अपने गमन-वर्ण्यांशों में सामाजिक विसंगतियों, मनुष्यगत दयनीय अपूर्णताओं तथा नैतिक पतन की स्थितियों को प्रकट किया है।
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