रामानन्ददिग्विजय महाकाव्य में “वैष्णव सम्बन्धी जीवनचर्या”

Author(s): डॉ० राका शर्मा

Abstract:

वैष्णव जनों को उचित है कि धर्मात्म गुरू में और भगवान् में तीव्र भक्तियोग करें। अन्य वैष्णवों के साथ नम्रभाव से व्यवहार करें। अनादर युक्त वचनों से कभी भी इन्हें नहीं बुलाना चाहिए-

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