International Journal of Multidisciplinary Horizon
ISSN No. : XXXX – XXXX
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline : +91 – 8368 241 690
Mail to Editor: [email protected]
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Author(s): प्रो. श्रीमती राजु बागलकोट
आधुनिक बोध का मतलब है- 'अर्वाचीन काल में नवीन जानकारी हासिल करना।' वैसे इस विषय का अर्थ बहुत ही लंबा-चौड़ा फैलता रहता है। आधुनिक धरातल पर लिखने वाले प्रत्येक लेखक या लेखिकाओं के रचनाओं में आज की नवीन युवा पीढ़ी के लिए कुछ ज्ञान, जीने लायक तसल्ली आदि देने का प्रयास किया जाता है। उन विचारों को पढ़कर पाठक निजी जीवन में जीने के लिए उन रचनाओं से कुछ न कुछ तो जरूर स्वीकारता है। चन्द लेखक अपनी ओर से किताबों में वक्तव्य की हैसियत से कह देते हैं। और चन्द लेखक उपन्यास कहानियों में पात्रों के माध्यम से अपने विचारों को भावी पाठक तक पहुँचाने में मदद होते हैं। इन सबको सोचने-समझने के बाद ऐसा लगता है कि लेखक ही समाज का निर्देशक है। आधुनिक युग में लेखक ही समाज की दो आँखें हैं। इसलिए महान युग-पुरुषों का नाम आज भी बड़े चाव से याद किया जाता है। उनका आदर्शवाद ही आज की पीढ़ी को आध्यात्मिक विचारधारा की ओर आकृष्ट करती रहती है। अच्छाई-बुराई की जाँच-पड़ताल कर ही इन्सान आज भी नाप-तौलकर जमीन पर पैर रख रहा है।
इस जमीन बोध के ऊपर विचार करेंगे तो, प्रेमचन्द, प्रसाद, पन्त, निराला आदि महान सृजनकर्ताओं का नाम लेना जरूरी है। उन महान साहित्यिक हस्तियों के बदौलत ही आज आधुनिक उपन्यास-साहित्य इतनी प्रमुखता पा चुकी है। उनका ज्ञान, उनकी दी हुई तसल्ली, उनकी धीरजता, संतोष ही आज हमें जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निमा रही है।