International Journal of Multidisciplinary Horizon
ISSN No. : XXXX – XXXX
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline : +91 – 8368 241 690
Mail to Editor: [email protected]
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Author(s): डॉ. पूनम आहूजा
प्रस्तुत शोध पत्र में मनुष्य शरीर में स्थित चक्रों का स्थान, उन पर ध्यान लगाने का शरीर पर प्रभाव और योग आसनों द्वारा किस प्रकार चक्र को संतुलित किया जाता है का अध्ययन किया गया है।
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मानव शरीर में स्थित सप्त चक्रों को शारीरिक ऊर्जा का केंद्र भी कहा जाता है।योग शरीर, मन ,आत्मा तीनों के बीच सामंजस्य बनाकर चक्रों की ऊर्जा को संतुलित करता है ।संस्कृत भाषा में शब्द 'चक्र' का अर्ध गोलाकार या पहिया होता है । इन चक्रों में बाधा होने से शारीरिक, भावनात्मक एवं मानसिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। चक्रों की यात्रा मूलाधार से लेकर सहस्त्र चक्र तक होती है ।भौतिक दृष्टि से शरीर में स्थित चक्र मेरुदंड में स्थित नाडी जाल के प्रतिनिधि हैं । इन चक्रों में अति सूक्ष्म कंपन होती है। सुष्मना में ही प्रत्येक चक्र का मूल व शक्ति केंद्र होता है। यह अत्यंत सूक्ष्म ज्ञानवर्धक और गतिवर्धक नाडी युगल के रूप में मेरुदंड में रहता है । इससे बाहर आकर नाडी गुच्छक के रूप में परिणित होकर चक्र के आकार में भागने लग जाते हैं । चक्रों की तरंगे उनसे संबंधित ग्रंथियों और अंगों की कार्य प्रणाली को व्यवस्थित करती हैं। पहले पांच चक्रों का संबंध ब्रह्मांड के पंच महा भूतों से संबंधित जाना जाता है और आज्ञा व सहस्त्र चक्र को शुद्ध चेतना से जोड़ा जाता है।