International Journal of Multidisciplinary Horizon
ISSN No. : XXXX – XXXX
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline : +91 – 8368 241 690
Mail to Editor: [email protected]
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Author(s): डॉ. वेद प्रकाश जोशी
"शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्" कहा जाता है, जो शरीर के प्राथमिक ज्ञान को सभी के लिए आवश्यक बनाता है। शरीर क्या है? उसमें जीवन का क्या महत्व है? आयुर्वेद को क्यों कहा जाता है? आयुर्वेद के अध्ययन का संबंध क्या है? और इसके अभाव में होने वाले परिणाम क्या होंगे? इन सभी सवालों के उत्तर देने के लिए प्रयास किए जाते हैं। विद्यालयों में आयुर्वेद का अध्ययन आवश्यक है, चाहे वह पारंपरिक गुरुकुल पद्धति हो या आधुनिक विद्यालय प्रणाली। आयुर्वेद केवल शरीर का विज्ञान नहीं है, बल्कि यह जीवन के सभी पहलुओं को समझने का एक साधन है। आयुर्वेद का अध्ययन प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च स्तर पर होना चाहिए।
संस्कृत में आयुर्वेद का अध्ययन होने के कारण संस्कृत का भी अध्ययन आवश्यक है। आयुर्वेद के अध्ययन में शास्त्र का परिचय, विषय का अवलोकन और प्रयोग का समावेश जरूरी है, ताकि उच्च स्तर पर चिकित्सा के अभ्यास को सुगम बनाया जा सके। इस प्रकार, यदि विद्यालयों में आयुर्वेद का प्राथमिक स्तर पर अध्याय प्रारंभ किया जाता है, तो यह न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाएगा, बल्कि समाज में आयुर्वेद के महत्व को भी उजागर करेगा।