International Journal of Multidisciplinary Horizon
ISSN: 3049 – 2017
Impact Factor (RJIF): 7.8
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline: +91 – 8368 241 690
Email: [email protected] / [email protected]
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Author(s): गीता देवी, डॉ राकेश कुमार सिंह
हरियाणा के लोकगीतों में नारी की छवि अत्यंत व्यापक,जीवंत और बहुआयामी रूप में प्रस्तुत होती है। ये लोकगीत केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि स्त्री जीवन के सामाजिक, सांस्कृतिक, मानसिक और भावनात्मक पहलुओं को प्रतिबिंबित करने वाले महत्वपूर्ण माध्यम हैं। लोक गीतों में नारी को कभी समर्पित पत्नी, स्नेहमयी मां, प्रिय बहन और संवेदनशील बेटी के रूप में दर्शाया गया है, तो कभी साहसी वीरांगना, कर्मठ श्रमिका और विद्रोही चेतना की धारक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। विवाह, व्रत -त्यौहार, धार्मिक अनुष्ठान , श्रम, प्रेम और विद्रोह जैसे विविध प्रसंगों पर आधारित लोकगीतों में स्त्री की भूमिका बहुपरतीय रही है।ये गीत नारी के त्याग,श्रम, और सामाजिक उपेक्षाओं को उजागर करते हैं। वहीं कई गीत स्त्री की आत्म अभिव्यक्ति, संघर्ष और शक्ति को भी स्वर देते हैं । लोकगीतों में दहेज़ प्रथा, स्त्री शिक्षा, पारिवारिक अत्याचार और लिंग भेद जैसे सामाजिक मुद्दों को भी गहराई से उकेरा गया है। हरियाणवी लोकगीतों में स्त्री की छवि पारम्परिक आदर्शों से जुड़ी होने के बावजूद समय के साथ - साथ बदलती दृष्टियों और सामाजिक चेतना का प्रतिबिम्ब भी है इन गीतों में नारी केवल सहनशील प्राणी नहीं, बल्कि परिवर्तन की वाहक भी दिखाई देती है इस प्रकार हरियाणा के लोकगीत नारी जीवन के विविध पक्षों को उजागर करने का विश्वसनीय स्रोत है।