International Journal of Multidisciplinary Horizon
ISSN: 3049 – 2017
Impact Factor (RJIF): 7.8
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline: +91 – 8368 241 690
Email: [email protected] / [email protected]
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Author(s): संध्या चौरसिया, डॉ. पुष्पा दुबे
बुंदेलखंड भारतीय सांस्कृतिक भूगोल का ऐसा विशिष्ट क्षेत्र है जहाँ लोकजीवन, इतिहास, वीर-परंपरा, भक्ति, प्रेम, लोकविश्वास और सामाजिक चेतना ने साहित्य को निरंतर प्रभावित किया है। इस क्षेत्र की प्रमुख लोकभाषा बुंदेली ने अपनी दीर्घ साहित्यिक परंपरा के माध्यम से क्षेत्रीय अस्मिता को अभिव्यक्ति प्रदान की है। बुंदेली साहित्य की परंपरा में वीरगाथात्मक आख्यानों से लेकर भक्तिकाव्य, रीतिकाव्य, लोकगीत, फाग, चौकड़िया, कहानी, उपन्यास, निबंध, आलोचना तथा आधुनिक गद्य तक विविध साहित्यिक रूप विकसित हुए हैं। समकालीन साहित्यिक सर्वेक्षणों में जगनिक, आचार्य केशवदास, ईसुरी, गंगाधर व्यास, नर्मदा प्रसाद गुप्त, रामनारायण शर्मा, बलभद्र तिवारी, कन्हैयालाल ‘कलश’ तथा अन्य अनेक रचनाकारों को बुंदेली साहित्य के विकास से संबद्ध किया गया है।
प्रस्तुत शोध-पत्र में बुंदेली साहित्यकारों के साहित्यिक अवदान का ऐतिहासिक, भाषिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि बुंदेली साहित्य केवल क्षेत्रीय भाषा में रचित साहित्य का संग्रह नहीं है, बल्कि यह बुंदेलखंड की सामूहिक स्मृति, लोकसंस्कृति, ऐतिहासिक चेतना और सामाजिक अनुभवों का सृजनात्मक दस्तावेज है। विशेष रूप से जगनिक की वीरगाथात्मक परंपरा, केशवदास की काव्यशास्त्रीय चेतना, अक्षर अनन्य की आध्यात्मिक दृष्टि, लाल कवि की ऐतिहासिक चेतना, ईसुरी की लोकाभिव्यक्ति, गंगाधर व्यास के लोकगायन तथा नर्मदा प्रसाद गुप्त और रामनारायण शर्मा के आधुनिक शोध एवं साहित्येतिहास-लेखन का विवेचन किया गया है।