International Journal of Multidisciplinary Horizon
ISSN: 3049 – 2017
Impact Factor (RJIF): 7.8
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline: +91 – 8368 241 690
Email: [email protected] / [email protected]
ISSN: 3049 – 2017
Impact Factor (RJIF): 7.8
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline: +91 – 8368 241 690
Email: [email protected] / [email protected]
Author(s): प्रिया, डॉ हिमानी यादव
भारतीय ज्ञान परंपरा वैदिक काल से ही समृद्ध रही है। भारतीय ज्ञान परंपरा में सर्वप्रथम वेद प्राप्त होते है, वेदों के चार भाग किये गये है। मंत्र आदि संहिता कहे जाते है। गृहस्थ आश्रम में ब्राह्मण ग्रन्थों का पालन किया जाता है। तथा वानप्रस्थ आश्रम में आरण्यक ग्रन्थों का चिंतन मनन किया जाता है। तथा सन्यास आश्रम में उपनिषद् आदि ग्रन्थों का महत्त्वपूर्ण ज्ञानराशि उपनिषद् है। अनेक विद्वानों के अनुसार उपनिषदों का काल 2500 ई पू. से 2000 ई.पू. तक मान जाता है।
यह उपनिषद् वर्तमान समय में मनुष्य के जीवन को कैसे सहजता से जीया जाये इसके लिए भी उपदेश करते है। मुक्तिका उपनिषद् में 108 उपनिषदों में प्रमुख योगोपनिषद् की चर्चा यहां करेंगे कैसे उपनिषदों में वर्णित योग तत्त्व वर्तमान मनुष्य की जीवन शैली को परिवर्तित कर उसके दुःखों का नाश कर सकते है। क्योंकि उपनिषद् को ब्रह्मविद्या भी कहा जाता है, और यह विद्या रोगों आदि का नाशकर मनुष्य के संपूर्ण जीवन का कायाकल्प कर उसे समग्र रूप से स्वास्थ्य प्रदान करती है। योग उपनिषदों में वर्णित योग के तत्त्व जैसे यम, नियम, आसन, प्राणायाम, ध्यान आदि वर्तमान समय में अत्यधिक उपयोगी है। उनकी चर्चा यहां शोध पत्र में की गयी है।