मानसिक स्वास्थ्य हेतु सकारात्मक भावनाएं एवं क्रियायोग

Author(s): रेखा रतूड़ी , डॉ. शोभा पाण्डेय

Abstract:

मानव जीवन में स्वास्थ्य सर्वाच्च धन माना गया है, अक्सर लोग स्वास्थ्य का तात्पर्य केवल शारीरिक सुदृढ़ता से लगाते हैं, जबकि सच्चा स्वास्थ्य शारीरिक, मानसिक और सामाजिक सभी स्तरों पर संतुलन का नाम है। शरीर की बीमारियाँ आमतौर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं और उनका इलाज भी सुलभ होता है, किंतु मानसिक समस्याएँ अपनी सूक्ष्म प्रकृति के कारण आसानी से पहचानी नहीं जातीं। परिणामस्वरूप, मानसिक विकृतियाँ उपेक्षित रह जाती हैं। यह एक कटु सत्य है कि मानसिक रोग व्यक्ति को अंदर ही अंदर तोड़ देते हैं और धीरे-धीरे उसके पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन को भी प्रभावित करते हैं, मानसिक स्वास्थ्य ही व्यक्ति की सोच, भावना, व्यवहार और जीवन दृष्टिकोण का मूल होता है, इसलिए यह कहना उचित है कि मानसिक स्वास्थ्य न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्वपूर्ण है बल्कि कई मायनों में उससे अधिक प्रभावशाली और निर्णायक भी है।

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