Author(s): डॉ. हेमन्त कुमार
Abstract:
प्रस्तुत आलेख “छत्तीसगढ़ के घुमंतू जाति समूह “नट” पर केन्द्रित है। अध्ययन का प्रमुख उददेश्य घुमंतू “नट” जाति समूह के खेल-तमाशा पर आधुनिकता के प्रभाव का अध्ययन, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, भाषायी, वस्त्र-आभूषण का अध्ययन एवं “नट” जाति समूह का नृजातिवृतांतात्मक चित्रण सह-संहिताकरण करना रहा है। नृजाति अध्ययन हेतु छत्तीसगढ़ राज्य के दो संभाग रायपुर एवं बिलासपुर का चयन उददेश्यमूलक निदर्शन पद्वति से (पुरुष 105, महिला 105) किया गया है। “नट” हिन्दी शब्द है जो न+ट दो शब्दो से मिलकर बना है, जिनका अर्थ नृत्य, नाटक, करतब, अथवा अभिनय करना है। “नट” को छत्तीसगढ़ी शब्द में “डंगचगहा” कहते हैं जो मुख्यता डंग+चगहा दो शब्दो से मिलकर बना है। जिसमें “डंग” शब्द का अर्थ “बाँस” तथा “चगहा” शब्द का अर्थ “चढ़ना” होता है। इस प्रकार “नट” (डंगचगहा) नाम का वास्ताविक अर्थ बाँस पर चढ़कर खेल दिखाना या “दो बाँस पर रस्सी के संहारे चलना” है। “नट” अपने समुदाय को राजपूतों से जोड़ते हुए अपने आप को एक प्रकार से “नट राजपूत” कहते हैं। भाषायी द्र्ष्ति से “नट” अपने भाषा-बोली को गुजराती भाषा से संदर्भित बताते हैं। अर्थात “नट” जाति समुदाय आपसी बातचीत के लिए “नट” भाषा-बोली का उपयोग करते हैं। गुजराती भाषा का लिखित प्रमाण है, जबकि “नट” भाषा-बोली का कोई लिखित प्रमाण नहीं है। “नटों” में समगोत्र विवाह का प्रचनल नहीं है। “नटों” में अशिक्षा, गरीबी, सामाजिक रूढ़ीवादी होने के साथ-साथ इनमें पुनर्जन्म की मान्यताओं पर विश्वास देखा गया है। “नट” शारीरिक बनावट की दृष्टि से द्रविड़ियन समूह के अन्तर्गत प्रदर्शित होता है।
PDF URL: View Article in PDF
