Author(s): रामप्रकाश चौधरी, डॉ. राशिद खान
Abstract:
भारत का स्वतंत्रता संग्राम एक व्यापक और बहुआयामी ऐतिहासिक प्रक्रिया थी। इसमें केवल महानगरों या राष्ट्रीय नेताओं की भूमिका ही नहीं, बल्कि भारत के प्रत्येक प्रांत, क्षेत्र और रियासत ने अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्रता की चेतना को जन्म दिया। मध्य भारत का बुंदेलखण्ड क्षेत्र इस दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि यहाँ की रियासतों ने न केवल राजनीतिक स्तर पर बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी ब्रिटिश शासन का विरोध किया। अजयगढ़ रियासत, जो बुंदेलखण्ड के मध्य में स्थित थी, इस संघर्ष की प्रमुख इकाई रही। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1947 तक अजयगढ़ की जनता, सैनिकों, किसानों और महिलाओं ने निरंतर ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध प्रतिरोध किया। अजयगढ़ का किला केवल एक दुर्ग नहीं रहा, बल्कि वह राष्ट्रीय चेतना, स्वाभिमान और स्वराज्य का प्रतीक बन गया। यह शोधपत्र अजयगढ़ रियासत की भूमिका का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है — इसकी राजनीतिक संरचना, सामाजिक संगठन, आर्थिक स्थिति, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी पर केंद्रित है। अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि अजयगढ़ की भूमिका भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की उस क्षेत्रीय चेतना का प्रतिनिधित्व करती है, जिसने औपनिवेशिक शासन को चुनौती दी और राष्ट्रवाद को जन-आंदोलन के स्वरूप में परिवर्तित किया।
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