Author(s): डा. सुमित्रा देवी
Abstract:
'विश्वेश्वरानन्द विश्वबन्धु संस्कृत एवं भारत-भारती अनुशीलन संस्थान' (VVBIS & IS) आधुनिक भारत में संस्कृत, वैदिक वाङ्मय और भारत-विद्या (Indology) के संरक्षण, संपादन, कोश-निर्माण और शोध के क्षेत्र में एक अद्वितीय और युगांतरकारी संस्थान है। बीसवीं शताब्दी के आरंभ में वर्ष 1903 में शिमला की सुरम्य वादियों से शुरू हुई यह ज्ञान-यात्रा लाहौर के शैक्षणिक परिवेश से होते हुए 1947 के देश-विभाजन के भयावह संकट के उपरांत पंजाब के होशियारपुर (साधु आश्रम) में स्थायी रूप से स्थापित हुई। स्वामी विश्वेश्वरानन्द, स्वामी नित्यानन्द और विशेष रूप से संस्थान के मूर्धन्य निदेशक आचार्य विश्वबन्धु के तपस्वी नेतृत्व ने भारतीय शोध परंपरा को पाश्चात्य समीक्षात्मक पाठालोचन (Textual Criticism) और भाषा-वैज्ञानिक पद्धतियों से समन्वित किया। प्रस्तुत शोध-पत्र का मुख्य उद्देश्य वीवीबीआईएसएण्डआईएस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इसके ऐतिहासिक स्थानांतरण, इसके द्वारा निष्पादित विश्वप्रसिद्ध ‘वैदिक-पदानुक्रम-कोष’ (Vedic Word Concordance), दुर्लभ पाण्डुलिपियों के विशाल संग्रह, विभिन्न ग्रन्थमालाओं (Research Series), शोध-पत्रिकाओं तथा संस्कृत एवं प्राच्य विद्या के पुनरुत्थान में इसके युगांतरकारी योगदान का समग्र, प्रामाणिक और गंभीर अकादमिक मूल्यांकन प्रस्तुत करना है। यह संस्थान पारंपरिक गुरुकुलीय ज्ञान-निष्ठा और आधुनिक विश्वविद्यालयीय वैज्ञानिक अनुसंधान के मध्य एक सुदृढ़ सेतु बनकर उभरा है।
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