Author(s): ज्योति परेता
Abstract:
शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न होकर ऐसे नैतिक एवं उत्तरदायी नागरिकों का निर्माण करना है, जो सत्य, धार्मिक आचरण, शांति तथा अहिंसा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात् कर सकें। प्रस्तुत शोधपत्र में भारतीय ज्ञान-परम्परा, बौद्ध एवं गांधीवादी दर्शन तथा संवैधानिक मूल्यों के आलोक में इन सार्वभौमिक मूल्यों की अवधारणा, स्वरूप एवं शैक्षिक महत्त्व का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट है कि मूल्यपरक शिक्षा चरित्र निर्माण, सामाजिक समरसता, मानवाधिकारों के सम्मान तथा मौलिक कर्तव्यों के निर्वहन की आधारशिला है। निष्कर्षतः विद्यालयी शिक्षा में मूल्य-आधारित शिक्षण, अनुभवात्मक अधिगम एवं नैतिक व्यवहार के समावेशन से शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण एवं उत्तरदायी समाज के निर्माण को सुदृढ़ किया जा सकता है।
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