Author(s): प्रो. नीता माथुर
Abstract:
वेद भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं ज्ञान विज्ञान के स्रोत हैं। वेद चतुष्ट्य, (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद) उपनिषदों तथा पुराणों में यज्ञों की अपार महिमा का निरुपण हुआ है। वेद एवं उपनिषद ब्रह्म ज्ञान और आत्म चेतना के वे शाश्वत आधार स्तंभ हैं, आत्मानुभूति की ऐसी आधार शिला हैं, जहां वैदिक ऋषियों ने आख्यानों, उपाख्यानो के माध्यम से आनन्दकन्द स्वरूप, रसानन्द ‘रसो वै सः’1 ब्रह्मानन्द का रसपान कराया है। उपनिषदों का उद्देश्य है - मानव को पुरुषार्थ चतुष्ट्य (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) की सिद्धि करते हुए जीवन लक्ष्य तक पहुंचाना तथा परम तत्व की अनुभूति कराना। वैदिक विचारधारा के अनुसार पंच महायज्ञो (भूत यज्ञ, पितृयज्ञ, अतिथि यज्ञ, देव यज्ञ और ब्रह्म यज्ञ ) का संपादन प्रत्येक व्यक्ति की जीवन पद्धति का अनिवार्य अंग था अतः वैदिक संस्कृति में यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म माना गया है।
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