Author(s): उमा पाराशर, डॉ. बृजमोहन द्विवेदी
Abstract:
डॉ. सुरेन्द्र सिंह चौहान समकालीन हिंदी साहित्य के एक महत्वपूर्ण रचनाकार हैं। डॉ. चौहान एक चिकित्सक होने के साथ–साथ संवेदनशील साहित्यकार हैं, जिनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, मानवीय पीड़ा, जीवन संघर्ष और नैतिक द्वंद की सशक्त अभिव्यक्ति मिलती है। डॉ. चौहान की रचनाओं में समाज व्यक्ति और समय की जटिलताओं का सजीव चित्रण मिलता है। डॉ. चौहान की रचनाएँ सामाजिक विषमताओं , भ्रष्टाचार और शोषण के खिलाफ जूझने की प्रेरणा देती है। डॉ. चौहान के लेखन में आध्यात्मिक चेतना के साथ–साथ वैचारिक पुष्टता और सामाजिक स्थिति को गहराई से विश्लेषित करने की अद्भुत क्षमता है। डॉ. चौहान की पुस्तकों में उनके अनुभव के विस्तार को साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है। डॉ. चौहान स्नेह के प्रतिमूर्ति हैं उनकी आँखों में समाज की पूरी संरचना और पीड़ा झांकती है। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य डॉ. चौहान के साहित्य का पाठ विश्लेषण करते हुए उनकी रचनाओं की विषयवस्तु, शिल्प, भाषा–शैली तथा वैचारिक दृष्टि का अध्ययन करना है। यह शोध डॉ. सुरेन्द्र चौहान के साहित्यिक योगदान को रेखांकित करते हुए समकालीन हिन्दी साहित्य में उनके महत्व को स्थापित करता है तथा भविष्य में उनके साहित्य पर होने वाले अध्ययन के लिए आधार प्रस्तुत करता है। यह अध्ययन पाठ-विश्लेषण एवं वर्णनात्मक शोध पद्धति पर आधारित है।
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