अवधूत गीता का सम्प्रत्यय, दार्शनिक महत्त्व एवं आधुनिक प्रासंगिकता ।

Author(s): आदेश नौडियाल

Abstract:

यह शोध पत्र भगवान दत्तात्रेय द्वारा रचित 'अवधूत गीता' में प्रतिपादित अद्वैत सिद्धान्तों का परीक्षण करता है। इसमें चर्चा की गई है कि कैसे यह ग्रन्थ (भागवत-महापुराण) ज्ञान मार्ग के माध्यम से द्वैत (Duality) का खण्डन करता है और आत्मा की नित्य मुक्त अवस्था का वर्णन करता है। यह शोध-पत्र आधुनिक सन्दर्भ में समत्व (Equanimity) की प्रासंगिकता को भी रेखांकित करता है।

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