International Journal of Multidisciplinary Horizon
ISSN No. : XXXX – XXXX
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline : +91 – 8368 241 690
Mail to Editor: [email protected]
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Author(s): डॉ. सुरेश्वर मेहेर
संसार में अनेक प्रकार के ज्ञान-विज्ञान का परिप्रकाश निरन्तर होता रहा है । मनुष्य अपने बुद्धि-कौशल का यथासंभव उपयोग कर तथ्य प्रदान करने में दक्षता हासिल की है । परन्तु स्वयं का यथार्थ परिचय क्या है? इस विषय में वह पर्याप्त रूप से सहमत नहीं है । विज्ञान की प्रगति के साथ-साथ मानव स्वयं से जोड़ने का तरीका शायद भूल बैठा है जिसके कारण उसको नाना प्रकार की परेशानियों को झेलना पड़ रहा है । आज के आधुनिक विज्ञान ने पदार्थ की सूक्ष्मतम स्थिति को जानने में बहुत प्रयास किया है तथा सफलता भी प्राप्त की है । परन्तु इन सब अनुसंधानों के पीछे कार्य करने वाली वो चैतन्य शक्ति कौन है? उसका स्वरूप क्या है? वो कैसे कार्य करती है? आदि विषयों के ऊपर शायद ही किसी प्रकार का जानने का प्रयत्न किया जा रहा है । इस सन्दर्भ पर प्रकाश डालने हेतु प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय अपने आध्यात्मिक दर्शन व विज्ञान के द्वारा स्वकीय अभिमत प्रकट करता है । इस संस्थान के मुख्य प्रवक्ता, बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न व्यक्तित्व, अध्यात्मवादी राजयोगी ब्रह्माकुमार जगदीश चन्द्र हसीजा ने तथा अन्य अध्यात्म-विज्ञानी ब्रह्माकुमार व ब्रह्माकुमारियों ने भी स्व-स्व कृतियों व व्याख्यानों के माध्यम से वैज्ञानिक चिन्तनधारा को समन्वित कर अभौतिक ऊर्जा ‘आत्मा’ के संरचनात्मक पहलू पर मन्तव्य उपस्थापित किया है, जिसका एक अनुशीलन इस शोधलेख के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है ।