International Journal of Multidisciplinary Horizon
ISSN No. : XXXX – XXXX
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline : +91 – 8368 241 690
Mail to Editor: [email protected]
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Author(s): डॉ. अरुणिमा मिश्रा
शिक्षा के क्षेत्र में मूल्यांकन हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण विषय रहा है। भारतीय शिक्षा प्रणाली में मूल्यांकन का अर्थ छात्रों को उत्तीर्ण (प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान) अथवा अनुत्तीर्ण के रूप में वर्गीकृत करने की प्रक्रिया माना जाता रहा। वर्ष के अंत में होने वाली परीक्षा यह तय करती थी कि छात्र कितना बुद्धिमान है। यह प्रक्रिया छात्रों के रटने की क्षमता का आंकलन मात्र करती थी, जिसमें उनके अन्य कौशल एवं विशेषताएँ गौण हो जाते थे तथा उनके संवर्धन हेतु उन्हें प्रोत्साहन नहीं मिल पाता था। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020) इस मानसिकता के लिए सुधारात्मक पहल करती है। यह तय करती है कि छात्रों के समग्र विकास के साथ उनका समग्र मूल्यांकन भी हो सके। NEP 2020 स्पष्ट करती है कि मूल्यांकन का प्राथमिक उद्देश्य छात्र को डराना या उसे असफल घोषित करना नहीं, बल्कि उसकी सीखने की यात्रा का समर्थन करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति सतत मूल्यांकन की बात करती है, जिसका अर्थ है कि मूल्यांकन केवल परीक्षा के दिनों में नहीं, बल्कि निरंतर कक्षा की गतिविधियों, चर्चाओं और प्रयोगों के माध्यम से होना चाहिए। मूल्यांकन की यह परिभाषा छात्रों एक चिंतनशील शिक्षार्थी के रूप में प्रोत्साहित करती है। NEP 2020 मूल्यांकन प्रक्रिया में समानता एवं वस्तुनिष्ठता लाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग की स्वीकृति प्रदान करती है। कुछ विद्यालयों में TARA, PRASHAST, PARAKH आदि A.I. आधारित उपकरणों का उपयोग भी किया जा रहा है। मूल्यांकन में सुधार की कोशिशें पहले भी हुई हैं, जिनमें ‘सतत और व्यापक मूल्यांकन’ (CCE) सबसे प्रमुख था। CCE का उद्देश्य भी छात्र का सर्वांगीण विकास था, लेकिन इससे शिक्षकों के लिए वास्तविक शिक्षण के बजाय ‘डेटा एंट्री’ पर जोर बढ़ गया। ग्रेडिंग सिस्टम को लेकर छात्रों और अभिभावकों में स्पष्टता नहीं हो सकी। CCE के बावजूद, अंतिम परीक्षाएं याददाश्त पर आधारित थीं जिससे कोचिंग संस्थानों का प्रभाव कम होने की अपेक्षा और बढ़ने लगा।