International Journal of Multidisciplinary Horizon
ISSN No. : XXXX – XXXX
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline : +91 – 8368 241 690
Mail to Editor: [email protected]
ISSN No. : XXXX – XXXX
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline : +91 – 8368 241 690
Mail to Editor: [email protected]
Author(s): महाबीर शुक्ल, प्रोफे. नीरू नत्थानी
पातञ्जल योगसूत्र में अष्टाङ्गयोग के अन्तर्गत ‘नियम’ साधक के आन्तरिक अनुशासन एवं आत्मबोध की आधारभूमि निर्मित करते हैं। शौच, सन्तोष, तप, स्वाध्याय एवं ईश्वरप्रणिधान ये पाँच नियम नैतिक-निर्देश, चित्तशुद्धि, अहंभाव-क्षय तथा आत्मसाक्षात्कार की क्रमिक साधना हैं। प्रस्तुत शोधपत्र में नियम का दार्शनिक विवेचन, आत्मबोध से उनका सम्बन्ध तथा साधक के आन्तरिक अनुशासन में उनकी भूमिका का विश्लेषण किया गया है। यह अध्ययन यह प्रतिपादित करता है कि नियम योगसाधना के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक आयामों को संतुलित करने का सशक्त साधन हैं।