International Journal of Multidisciplinary Horizon
ISSN No. : XXXX – XXXX
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline : +91 – 8368 241 690
Mail to Editor: [email protected]
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Author(s): अनु देवी, डॉ.सपना चन्देल
प्रस्तुत शोध में भारतीय समाज में जाति-व्यवस्था के उद्भव, विकास और उसके दुष्प्रभावों का अध्ययन किया गया है। इसमें बताया गया है कि कर्म-आधारित वर्ण-व्यवस्था कालान्तर में जन्म-आधारित जाति-प्रथा बनकर सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के लिए बाधक बनी। जातिवाद, अस्पृश्यता और ऊँच-नीच की भावना ने समाज को विभाजित किया। पण्डित दुर्गादत्त शास्त्री ने अपने काव्य के माध्यम से इसका विरोध करते हुए मानवता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि माना। निष्कर्षतः, जातिवाद का उन्मूलन ही सुदृढ़ राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक है।