International Journal of Multidisciplinary Horizon
ISSN: 3049 – 2017
Impact Factor (RJIF): 7.8
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline: +91 – 8368 241 690
Email: [email protected] / [email protected]
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Author(s): आकांक्षा द्विवेदी
यह शोधपत्र संस्कृत साहित्य विशेषतः प्रतीकात्मक नाट्य परम्परा में कवि आनन्दराय मखिन के योगदान का अध्ययन प्रस्तुत करता है। संस्कृत नाट्यधारा में जहां प्रायः पौराणिक एवं ऐतिहासिक कथानकों का स्थान रहा है। वही आनन्दराय मखिन् ने प्रतीकात्मक शैली के माध्यम से अमूर्त दार्शनिक एवं आध्यात्मिक तत्त्वों को सजीव एवं सुलभ रूप में अभिव्यक्त किया है। इस अध्ययन में उनकी प्रमुख कृतियों- जीवानन्दनम एवं विद्यापरिणयनम् - का विश्लेषण किया गया है। जिससे यह प्रतिपादित होता है कि उन्होंने ज्ञान, भक्ति, अविद्या, रोग, बुद्धि आदि अमूर्त तत्त्वों को मानवीकृत कर जटिल दार्शनिक एवं आयुर्वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल एवं रोचक रूप में प्रस्तुत किया है। शोधपत्र यह भी स्पष्ट करता है कि आनन्दराय मखिन् की रचनाओं में शिवभक्ति, जीवन- दर्शन की सूक्ष्मता तथा लोकमङ्गल की भावना प्रमुख रूप से परिलक्षित होती है। उन्होंने नाटक को केवल मनोरञ्जन का साधन न मानकर ज्ञान के प्रसार का प्रभावी माध्यम सिद्ध किया है।