International Journal of Multidisciplinary Horizon
ISSN: 3049 – 2017
Impact Factor (RJIF): 7.8
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline: +91 – 8368 241 690
Email: [email protected] / [email protected]
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Author(s): दवे हरिओम हर्षदभाई
भारतीय संस्कृति में वेदों के अतिरिक्त अनेक शास्त्र और पुराणादि ग्रंथ ऐसे हैं जिससे मनुष्य के जीवन में चारों पुरुषार्थ प्राप्त करने के उपाय प्राप्त किये जा सकते हैं ऐसा ही एक ग्रंथ जो साक्षात श्री कृष्ण के मुखारविंद से प्रकट हुआ है जिसका नाम श्रीमद् भगवद् गीता है। इस ग्रंथ रत्न में व्यावहारिक जीवन के रहस्य प्रतिभाषित होते हैं। उपनिषद रूपी कल्पतरु से यह ग्रंथ प्रादुर्भूत हुआ जिससे समस्त ब्रह्मांड ने एवं समस्त मानवता के लिये अपूर्व कल्याणप्रद मार्ग प्रशस्त हुआ। इस ग्रंथ के अनेक पक्ष हैं तथापि इस निबंध में मैंने व्यावहारिक जीवन उपयोगी प्रेरक संदर्भों की चर्चा की है।
श्रीमदभगवतगीता की योजना महाभारत में की गई है1 इसके अनुसार जीवन का आदर्श मानव कैसा होता है इस तथ्य को गीता में देखा जा सकता है क्योंकि गीता एक व्यावहारिक शास्त्र है जो अध्यात्म ज्ञान की पृष्ठभूमि में स्थित है। इस निबंध में भगवद् गीता का विषय विवेचन संस्कृत साहित्य में इसकी टीकाएँ रहस्य, व्यावहारिक जीवन के प्रेरक सूत्र जिसमें जन्म से मृत्यु पर्यन्त मार्ग निर्देशित किया है। अर्जुन को लक्ष्य बनाकर समस्त मानवों के लिये अनेक सूत्र प्रदान किये गये हैं। जैसे धर्म विषयक प्रेरक सूत्र, अर्थ विषयक, काम विषयक प्रेरक और मोक्ष विषयक प्रेरक सूत्र।