International Journal of Multidisciplinary Horizon
ISSN: 3049 – 2017
Impact Factor (RJIF): 7.8
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline: +91 – 8368 241 690
Email: [email protected] / [email protected]
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Author(s): Dr. Ambili MK
आधुनिक हिन्दी साहित्य में व्यंग्यकार के रूप में विख्यात शरद जोशी जी ने आधुनिक समाज और राजनीति के विभिन्न् विषयों को लेकर हिन्दी व्यंग्य नाटक क्षेत्र में अपना अलग अस्तित्व स्थापित की है। उनके दो व्यंग्य नाटक “एक था गधा उर्फ अलदाद खाँ” तथा “अंधों का हाथी” आधुनिक व्यंग्य की महत्वपूर्ण उपलब्धी मानी जाती है। शरद जोशी ने व्यंग्य नाटकों के साथ एकांकी नाटकों की रचना भी की है जो व्यंग्य के पैनेपन की दृष्टि से बेजोड है। “हम कहाँ थे” और “अपनी अपनी कैद” में सामाजिक विसंगतियों को ही व्यंग्यात्मक रूप में चित्रित किया है। समाज की छोटे- छोटे पहलुओं को उन्होंने इस प्रकार चित्रित किया है जिससे दर्शक व पाठक एक साथ तिलमिला हो जाते है।
समाज में व्यक्ति की विवशता, विसंगति, अकेलेपन और घबराहट पर लिखा गया व्यंग्य विधा है प्रस्तुत एकांकी। व्यंग्य ने एक नयी विधा के रूप में अपना जो अस्तित्व पा लिया है उसमें शरद जोशी जी का योगदान महत्वपूर्ण है। ‘अपनी अपनी कैद’ व्यंग्य एकांकी है पर बात यह है कि इसमें कौन सा व्यंग्य प्रकट हुआ है, इसे समझने के लिए व्यंग्य के विभिन्न रूपों पर भी नजर डालना जरूरी है। व्यंग्य का वर्गीकरण कई आधारों पर किया जा सकता है । दर्शक या पाठक गण पर एकांकी जो प्रभाव डालता है इसके आधार पर व्यंग्य तीन प्रकार के है।