International Journal of Multidisciplinary Horizon
ISSN: 3049 – 2017
Impact Factor (RJIF): 7.8
Peer Reviewed Journal
Author’s Helpline: +91 – 8368 241 690
Email: [email protected] / [email protected]
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Author(s): Dr. Aloke Mondal
वर्तमान समय में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। पारंपरिक शिक्षण पद्धति के साथ कंप्यूटर, इंटरनेट, मल्टीमीडिया और डिजिटल संसाधनों के बढ़ते उपयोग ने शिक्षा को अधिक आधुनिक, लचीला और विद्यार्थी-केंद्रित बनाया है। इसी परिवर्तन के परिणामस्वरूप ई-लर्निंग उच्च शिक्षा में एक महत्वपूर्ण नवाचारी शिक्षण रणनीति के रूप में विकसित हुई है। ई-लर्निंग से आशय इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों द्वारा समर्थित ऐसी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया से है, जिसमें कंप्यूटर, इंटरनेट, नेटवर्किंग, मल्टीमीडिया तथा अन्य डिजिटल तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
उच्च शिक्षा में ई-लर्निंग के माध्यम से विद्यार्थी ऑनलाइन पाठ्यक्रम, ई-कंटेंट, डिजिटल पुस्तकालय, वीडियो व्याख्यान, वर्चुअल कक्षाएँ, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, लाइव चैट और अन्य डिजिटल संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को कहीं भी और कभी भी सीखने, अपनी गति के अनुसार अध्ययन करने तथा अध्ययन सामग्री का बार-बार उपयोग करने की सुविधा मिलती है। ई-लर्निंग विद्यार्थियों में स्व-अधिगम, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता, समस्या-समाधान, सहयोगात्मक अधिगम तथा डिजिटल दक्षता के विकास में सहायक होती है। साथ ही, शिक्षक की भूमिका भी केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित न रहकर मार्गदर्शक, Facilitator और सीखने की प्रक्रिया के समन्वयक के रूप में विकसित हुई है।
ई-लर्निंग के प्रमुख लाभों में शिक्षा की व्यापक पहुँच, समय एवं स्थान की स्वतंत्रता, गुणवत्तापूर्ण डिजिटल सामग्री की उपलब्धता, सक्रिय विद्यार्थी सहभागिता तथा डिजिटल कौशल का विकास शामिल हैं। इसके साथ ही इंटरनेट एवं तकनीकी सुविधाओं की कमी, डिजिटल डिवाइड, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों में डिजिटल साक्षरता की कमी, तकनीकी समस्याएँ तथा ऑनलाइन मूल्यांकन की विश्वसनीयता जैसी चुनौतियाँ भी मौजूद हैं। इसलिए ई-लर्निंग की सफलता के लिए तकनीकी आधारभूत संरचना, प्रशिक्षित शिक्षक, गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट और प्रभावी मूल्यांकन व्यवस्था आवश्यक है।
उच्च शिक्षा में ई-लर्निंग की अवधारणा, आवश्यकता, लाभ, चुनौतियों, नवाचारी शिक्षण एवं मूल्यांकन विधियों तथा सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन करना है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि ई-लर्निंग उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, पहुँच और प्रभावशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। Blended Learning, नियमित Feedback, इंटरैक्टिव गतिविधियों और गुणवत्तापूर्ण डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग से ई-लर्निंग को अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है। अतः आधुनिक उच्च शिक्षा में ई-लर्निंग को एक उपयोगी और प्रभावी नवाचारी रणनीति के रूप में अपनाना समय की आवश्यकता है।