पराई डाल का पंछी : मन की अतृप्त इच्छाओं का सैलाब

Author(s): डॉ. कीर्ति चूण्डावत

Abstract:

मानवीय मन संवेदनाओं और विचारों का गर्भगृह है । मनुष्य की सारी विचारात्मक अनुभूतियां मस्तिष्क से जुड़ी है परंतु मन का नियंत्रण मनुष्य के संपूर्ण अस्तित्व पर है ।साहित्य इन्हीं मन के विचारों को लेखनी में पिरोने का माध्यम है ।कुछ लेखक मन की आंतरिक चेतना को वाणी देने में सिद्ध हस्त होते हैं इन्हीं लेखकों में अमरकांत का साहित्य कुछ नये संदर्भों को दर्शाता है।उनका साहित्य नयी चेतना और मानसिक अवलोकन द्वारा व्यक्ति के आंतरिक मन की गहन पड़ताल करता है ।वे अपने समय, परिस्थिति एवं समाज के सूक्ष्म अन्वेषक रहे हैं । साहित्यकार के साहित्य पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसके निर्माण की पृष्ठभूमि के मूल रूप में अनेक वैयक्तिक व समसामयिक परिवेश का प्रभाव अवश्य दृष्टिगोचर होता है। वह अपने जीवन अनुभवों को अपने साहित्य में संजोता चलता है।साहित्यकार पर आंतरिक एवं बाह्य परिस्थितियों के प्रभाव देखे जाते रहे हैं।स्वतंत्रता के पश्चात जिन चुनौतियों से समाज, राजनीति एवं व्यक्ति प्रभावित हो रहे थे उन्हीं प्रभावों ने साहित्य को नई धरती प्रदान की ।

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