Author(s): प्रो. शीतलाप्रसाद शुक्ल
Abstract:
आध्यात्मिक जगत में मानव प्रतिदिन प्रातःकाल सप्तर्षियों को प्रणाम कर अपनी दिनचर्या का शुभारम्भ करता है। महर्षि गौतम भी उनमें प्रमुख हैं। वे ब्रह्माण्डीय एवं मुहूर्त-ज्ञान के परम विद्वान थे तथा ज्योतिषीय न्याय के प्रवर्तक माने जाते हैं। महर्षि गौतम देव-दानव, मानव के स्वभाव को अन्तर्दृष्टि से देखते थे जिसका अनुमान वे निमिष मात्र में लगा देते थे। ग्रहों में जैसे शनि को न्याय का ग्रह माना गया है उस न्याय के प्रवर्तक तो महर्षि गौतम ही हैं जिसकी परिगणना ज्योतिष में महत्वपूर्ण रहती है।
PDF URL: View Article in PDF
