Author(s): डॉ. विश्वामित्र राय
Abstract:
अनन्त जगत में भारतवर्ष ही ऐसि भूमि है जो कि देवभूमि नाम से परिचित है, जिसमें व्यवहार किये जाने वाली भाषा देवभाषा संस्कृत नाम से सुविख्यात है । उसी भाषा में अनेकों ग्रन्थ विश्वप्रसिद्ध हुए परन्तु श्रीरामचन्द्रजी के द्वारा प्रदर्शित मार्ग रामायण सबसे बढकर है जहाँ मानवीय मूल्यों की प्राचुर्यता पाई जाती है । उनको आधार मानकर ही स्वामी श्री वेदान्तदेशिक प्रणीत हंस सन्देश काव्य मे हम मानवीय मूल्यों का अवलोकन करेंगे । तथा उनका हमारे नवीन राष्ट्रियशिक्षानीति में किस प्रकार छात्रों के हित मे उपयोगकारि होगा यह विषय शोधपत्र के माध्यम से वर्णित होगा ।
PDF URL: View Article in PDF
