Author(s): Dr. Mou Goswami
Abstract:
वर्तमान समय में डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मानव जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों को प्रभावित कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संबंधों में एआई आधारित प्रणालियाँ कार्यकुशलता, गति और सटीकता प्रदान कर रही हैं। इसके बावजूद यह चिंता भी बढ़ रही है कि अत्यधिक तकनीकी निर्भरता के कारण मानवीय मूल्य जैसे करुणा, नैतिकता, समानता और उत्तरदायित्व कमजोर न पड़ जाएँ। ऐसे समय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित समग्र मानवतावाद की अवधारणा विशेष रूप से प्रासंगिक हो जाती है। समग्र मानवतावाद मनुष्य को केवल आर्थिक या भौतिक इकाई नहीं मानता, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का समन्वित स्वरूप मानता है। यह विचारधारा मानव के सर्वांगीण विकास पर बल देती है। एआई के वर्तमान युग में यह आवश्यक हो गया है कि तकनीकी विकास मानव-केंद्रित और मूल्य-आधारित हो। उदाहरण के लिए, शिक्षा में एआई आधारित तकनीक विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता का विश्लेषण कर सकती है, लेकिन शिक्षक की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण रहती है क्योंकि वही नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और प्रेरणा का विकास करता है। अतः यह आवश्यक है कि तकनीकी प्रगति को मानवीय मूल्यों के साथ संतुलित किया जाए। एआई तभी मानव समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होगा जब उसका उपयोग मानव कल्याण, सामाजिक न्याय और नैतिकता के आधार पर किया जाए।
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