Author(s): शुभम मिश्र, प्रो.प्रेम शंकर उपाध्याय, प्रो.सुनील कात्यायन, डॉ पूनम शर्मा
Abstract:
मानव जीवन में उपयोग होने वाली सभी वस्तुएँ प्रारम्भ से ही पृथ्वी पर उपलब्ध थीं। समय के साथ मनुष्य ने अपनी बुद्धि और अनुभव का उपयोग करके अपनी आवश्यकताओं के अनुसार नए-नए आविष्कार किए। आवश्यकता ही आविष्कार की प्रेरणा बनी। प्राचीन काल से ही मनुष्य रोगों से बचाव और उपचार के लिए प्राकृतिक औषधियों का सहारा लेता रहा है। उस समय जनसंख्या कम और वनस्पतियाँ अधिक होने के कारण वातावरण शुद्ध तथा ऑक्सीजन की मात्रा पर्याप्त थी, जिससे रोग भी अपेक्षाकृत कम होते थे। वर्तमान समय में अत्यधिक प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के कारण पर्यावरण का संतुलन प्रभावित हुआ है। इसलिए आज फिर से प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। भारतीय संस्कृति में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र का संबंध वैदिक ज्ञान से माना गया है। वैदिक वाङ्मय एक विशाल ज्ञान-भंडार है, जिसमें जीवनोपयोगी अनेक प्रकार के ज्ञान और विज्ञान का समावेश है। किसी भी विषय की मूल अवधारणा को समझने के लिए वेदों का अध्ययन आवश्यक माना जाता है। इस अमूल्य ज्ञान-संपदा से नई- नई जानकारियाँ प्राप्त करने का प्रयास आज भी निरंतर जारी है। चिकित्सा विज्ञान का प्रमुख आधार विशेष रूप से अथर्ववेद को माना गया है।
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