आधुनिक संदर्भ में आयुर्वेद और मानसिक स्वास्थ्य का अध्ययन

Author(s): निश्चला

Abstract:

आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परम्परा का महत्वपूर्ण शास्त्र है । जोकि मानव को स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करता है । आधुनिक समय में मानव भागदौड़, प्रतिस्पर्धा, सोशल मीडिया तथा आर्थिक सम्पन्नता के मोह में इतना लीन हो गया है कि उसका मानसिक स्वास्थ्य स्वतः ही क्षतिग्रस्त हो रहा है। तनाव, अवसाद, अनिद्रा और चिंता जैसी समस्याएँ आज सामान्य जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं । आयुर्वेद, जो भारतीय ज्ञान परम्परा का एक प्राचीन शास्त्र तथा मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा हेतु समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है । इसमें दैवव्यपाश्रय, युक्तिव्यपाश्रय और सत्त्वावजय जैसी चिकित्सा पद्धतियाँ वर्णित हैं, जो मनुष्य को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर संतुलित करती हैं । शरीर, इन्द्रिय, मन तथा आत्मा के संयोग से ही जीवन की पूर्णता संभव होती है । परन्तु यदि मन तनाव, अवसाद, चिंता, अनिद्रा तथा सोशल मीडिया के अत्यधिक स्क्रीन टाइम जैसी चुनौतियों से घिरा हो, तो मानसिक स्वास्थ्य गहराई से प्रभावित होता है । आयुर्वेद इन समस्याओं को केवल रोग के रूप में नहीं देखता प्रत्युत मानस रोग अथवा प्रज्ञापराध के रूप में देखता है । अतः मानस रोग के लिए बुद्धि तथा धैर्य से व्यवहार करना, आत्मादि विज्ञान का विचार करना ही औषध माना गया है । प्राणायाम, योग, आसन, नियमित आहार, उचित जीवनशैली भी मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालती है । प्रस्तुत अध्ययन का मुख्य उद्देश्य आधुनिक मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों के संदर्भ में आयुर्वेद की उपयोगिता को स्पष्ट करना है । यह सिद्ध करता है कि आयुर्वेद केवल एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति नहीं है, प्रत्युत वर्तमान समय में भी मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत प्रासंगिक और प्रभावी है ।

PDF URL: View Article in PDF