जैन दर्शन में अहिंसा और उसकी उपयोगिता

Author(s): गुंजन जैन

Abstract:

जैन साहित्य भारतीय बौद्धिक परम्परा का एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण एवं समृद्ध अंग है, जिसने सामाजिक, आर्थिक, आध्यात्मिक, दार्शनिक, नैतिक, वैचारिक तथा ज्ञान–वैज्ञानिक क्षेत्रों में गहन एवं स्थायी प्रभाव छोड़ा है। इसकी विषयवस्तु न केवल धार्मिक आस्थाओं तक सीमित है, अपितु मानव जीवन के समग्र विकास और सामाजिक व्यवस्था के नैतिक अनुशासन को भी सुव्यवस्थित रूप प्रदान करती है।

PDF URL: View Article in PDF