Author(s): अखिलेश कुमार बसेडिया
Abstract:
यह शोधलेख भाषा के स्वरूप, महत्व और भारतीय चिंतन में उसकी केंद्रीय भूमिका को स्पष्ट करता है। भाषा मानव ज्ञान, विचार और अभिव्यक्ति का मूल साधन है, जिसे भारतीय परंपरा दिव्य शक्ति मानती है। संस्कृत भारतीय संस्कृति और ज्ञान-परंपरा की मूल भाषा है, जिसने दर्शन, विज्ञान, कला और साहित्य को गहराई प्रदान की। भारतीय ज्ञान-परंपरा वेदों, उपनिषदों और शास्त्रों के माध्यम से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को दिशा देती है। - यह शोधलेख उपनिषद में वर्णित पंचकोश सिद्धांत को प्रकाशित करते हुए विज्ञानमय कोश और भाषा के संबंध स्पष्ट करता है । विज्ञानमय कोश सत्य की पहचान कराने और सही निर्णय लेने में सहायता करता है। योग और ध्यान इन कोषों को संतुलित करते हैं तथा मनुष्य को शांत, जागरूक और उद्देश्यपूर्ण जीवन की ओर ले जाते हैं।
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